04 Apr 2020, 15:16 HRS IST
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  • करता रहूंगा समुद्र विज्ञान के लिए काम : पीएस राव
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    पणजी, 13 दिसंबर (भाषा) समुद्र वैज्ञानिकों में ‘‘समुद्री राकेश शर्मा’’ के नाम से मशहूर डॉ. पी.एस. राव इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त हो जाएंगे, लेकिन वह सेवानिवृत्ति के बाद भी समुद्र विज्ञान के लिए काम जारी रखने की इच्छा रखते हैं।राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (एनआईओ) के प्रमुख वैज्ञानिक राव ऐसे पहले भारतीय हैं जो मानवयुक्त सबमर्सिबल में सवार होकर गहरे समुद्र में गए थे और तब से वह समुद्री वैज्ञानिकों के बीच ‘‘समुद्री राकेश शर्मा’’ कहलाने लगे।
    राव 20 साल पहले 19 अगस्त 1997 को अटलांटिक महासागर में अमेरिकी सबमर्सिबल ‘डीएसवी एलविन’ में सवार होकर ‘हाइड्रो थर्मल वेंट’ सिस्टम का अध्ययन करने मध्य अटलांटिक रिज में 3,850 मीटर की गहराई पर गए थे।उल्लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना के पायलट राकेश शर्मा अप्रैल 1984 में तत्कालीन सोवियत संघ के ‘सोयूज टी-11’ में सवार होकर अंतरिक्ष में गए थे और वह अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय हैं। उन्हीं के नाम पर समुद्री वैज्ञानिक पीएस राव को उनके वैज्ञानिक मित्र ‘‘समुद्री राकेश शर्मा’’ कहते हैं।एनआईओ के खुद के अनुसंधान पोत ‘आरवी सिंधु साधना’ में राव ने पीटीआई-भाषा से विशेष बातचीत में कहा कि भारत आज समुद्री अनुसंधान क्षेत्र में एक अग्रणी दे बन चुका है और वह इस क्षेत्र में दुनिया के अव्वल देशों की श्रेणी में शामिल है।उन्होंने कहा कि भारत के पास अभी खुद की मानवयुक्त सबमर्सिबल (समुद्र की गहराइयों में पानी के भीतर जाने वाला वाहन) नहीं है तथा देश के पास यह अनुसंधान प्रणाली आ जाने से समुद्री अनुसंधान में उसे और बढ़त मिल जाएगी।राव ने बताया कि अभी दुनिया के पांच देशों-रूस, जापान, फ्रांस, चीन और अमेरिका के पास मानवयुक्त सबमर्सिबल प्रणाली है और भारत में अभी इस पर काम चल रहा है तथा राष्ट्रीय समुद्री प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओ-टी)-चेन्नई को यह परियोजना सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर डॉ. रामदास के नेतृत्व में काम चल रहा है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि ‘सबमर्सिबल’ और ‘सबमरीन’ में अंतर होता है। ‘सबमर्सिबल’ समुद्र की तलहटी तक जा सकती है, जबकि ‘सबमरीन’ से ऐसा संभव नहीं है।राव ने कहा कि इस महीने के अंत में वह सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, लेकिन वह सेवानिवृत्ति के बाद भी समुद्र विज्ञान के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज वह जो भी हैं, समुद्र विज्ञान की वजह से हैं।अनुसंधान पोत प्रबंधन के प्रमुख राव ने कहा कि एनआईओ के पास खुद के दो अनुसंधान पोत-आरवी सिंधु साधना (80 मीटर लंबा) तथा आरवी सिंधु संकल्प (56 मीटर लंबा) हैं।उन्होंने कहा कि अन्य पोतों के साथ इन दो पोतों ने समुद्री अनुसंधान कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और समुद्री वैज्ञानिक इनकी मदद से उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।संपादकीय सहयोग :अतनु दास

       

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