04 Apr 2020, 14:46 HRS IST
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  • नेपाल को अपना सैटेलाइट न समझे कोई देश : माधव कुमार नेपाल
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  •                                               : दीपक रंजन : 
    काठमांडू, तीन दिसंबर :भाषा:
     पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने चीन और नेपाल के बीच बढ़ रहे दोस्ताना संबंधों का बचाव करते हुए कहा है कि उनका देश आत्म सम्मान एवं सम्प्रभुता के आधार पर पड़ोसी देशों के साथ संबंध बनाना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह कैसे हो सकता है कि एक पड़ोसी देश के साथ हमारे संबंध हों और दूसरे देश के साथ न हों।’’ 
    माधव कुमार नेपाल ने ‘‘पीटीआई भाषा’’ से साक्षात्कार में हालांकि भारत और नेपाल के बीच मजबूत संबंधों की भी वकालत की और कहा, ‘‘ नेपाल और भारत के संबंध अच्छे हैं । हमें इन संबंधों को और करीबी एवं गर्मजोशी भरा बनाने के लिये लगातार काम करना है।’’ 
    नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने कभी भी भारत के खिलाफ न तो चीन-कार्ड का इस्तेमाल किया और न ही चीन के खिलाफ भारत-कार्ड का । उन्होंने साथ में जोड़ा, "नेपाल के आंतरिक मामलों को न तो कोई निर्देशित करे और न ही उसे कोई अपना सैटेलाइट समझे।" 
    उन्होंने कहा, ‘‘ भारत और नेपाल के संबंध ऐसे होने चाहिए जहां दोनों के लिये फायदे की स्थिति बने । नेपाल कभी भी भारत के हितों के खिलाफ नहीं सोच सकता । ऐसा करने से हमें क्या फायदा होगा ? भारत एक बड़ा पड़ोसी देश है जिसके साथ हमारे पुराने भावनात्मक संबंध रहे हैं । लेकिन आज विश्व व्यवस्था में कारोबार का महत्वपूर्ण स्थान है और हम चाहते हैं कि नेपाल प्रगति के पथ पर आगे बढ़े तथा हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले ।’’ 
    माधव नेपाल ने कहा कि भारत एक बड़ा देश है जहां से खासा निवेश हो सकता है । नेपाल भारत से कारोबार में रियायत चाहता है । 
    भारत-नेपाल के संबंधों में खटास का कारण पूछे जाने पर नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल की यात्रा के दौरान जब संसद को संबोधित किया था, तब इसका नेपाल के जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ा । उन्होंने कहा, तब दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिली लेकिन यह स्थिति लम्बे समय तक नहीं रही और मधेसी मुद्दे पर घेराबंदी :ब्लॉकेड: के कारण संबंध प्रभावित हुए। 
    उन्होंने हालांकि कहा कि इन बातों का जिक्र करते रहने की बजाय दोनों देशों को आगे बढ़ने की जरूरत है । 
    माधव नेपाल का आकलन है कि कुछ समय पहले हुई प्रधानमंत्री मोदी की नेपाल यात्रा के बाद चीजें फिर से पटरी पर लौटने लगी हैं और राजनीतिक नेतृत्व को इस दिशा में सतत प्रयास करने की जरूरत है ।

    चीन-नेपाल संबंध को लेकर एक वर्ग की चिंता के बारे में उन्होंने कहा कि चीन के साथ नेपाल का अगर सड़क, रेल या वायु सम्पर्क बढ़ता है और व्यापार बढ़ता है तो इससे भारत को क्या नुकसान हो सकता है।

    नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, कि नेपाल के व्यापारियों को चीन के ग्वानजाऊ क्षेत्र से सामान लाने के लिए कोलकाता बंदरगाह का उपयोग करना पड़ता है और वहां भीड़ के कारण उन्हें अतिरिक्त शुल्क :डैमेज: देना पड़ता है तथा परेशानियों का सामना का सामना करना पड़ता है। उनका तर्क था कि चीन से सीधे रेल, सड़क सम्पर्क से नेपाल को फायदा होगा। 
    भारत और नेपाल के बीच मजबूत कारोबारी संबंधों की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पनबिजली के क्षेत्र में बहुत सहयोग कर सकता है । उन्होंने कहा, नेपाल में पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं, भारत आधारभूत ढांचा क्षेत्र के विकास में उसे सहयोग कर सकता है ।

    उन्होंने हालांकि चिंता जताई कि कई भारतीय परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं होतीं और भारत सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है । 

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