04 Apr 2020, 14:9 HRS IST
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  • अनमोल पूंजी होगी‘ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ’ : राम सुतार
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  • .                                           शरद अग्रवाल

    नयी दिल्ली, 11 अगस्त :भाषा: पद्मश्री से सम्मानित प्रतिष्ठित मूर्तिकार राम वानजी सुतार का मानना है कि गुजरात में नर्मदा नदी में प्रस्तावित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के बारे में लोगों का यह विचार कि यह रूपए की बर्बादी है, एक विचार के तौर पर अधूरा है। उनके अनुसार प्रतिमाएं भविष्य के लिए इतिहास की धरोहर के रूप में अनमोल होती हैं।राम ने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘यह जो प्रतिमा बनेगी क्या वह सिर्फ पैसे से बनेगी? इसके निर्माण से कितने कलाकारों, मजदूरों, आर्किटेक्ट और इंजीनियरों को काम मिलेगा। ऐसी ऐतिहासिक परियोजनाओं में धन का पक्ष गौण हो जाता है हालांकि पुराने स्मारकों और पुरामहत्व के स्थानों के बारे में कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि लोगों के पास कोई काम नहीं था खामख्वाह में इसे बना दिया।’’ संसद भवन में ध्यान मुद्रा में महात्मा गांधी की प्रतिमा बनाने वाले राम के पुत्र अनिल राम सुतार भी मूर्ति बनाने के काम में अपने पिता की मदद करते हैं। उन्हें उम्मीद है कि ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ को बनाने का मौका उन्हें ही मिलेगा।मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना के निर्माण का कार्य राम सुतार को मिलने के संबंध में अखबारों में छपी खबरों के बारे में पूछे जाने पर अनिल ने कहा, ‘‘सरदार पटेल के स्मारक के लिए टेंडर भरने वाली कंपनी के साथ हमारी एक मौखिक सहमति बन चुकी है, जैसे ही सारी प्रक्रियाएं पूर्ण होंगी इस बारे में आधिकारिक घोषणा की जाएगी।’’ अनिल ने बताया कि कंपनी ने उनके पिता का काम और अनुभव देखा है।इसके अतिरिक्त उन्होंने अहमदाबाद एयरपोर्ट के लिए भी 80 फुट उंची एक मूर्ति बनाई है जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तारीफ कर चुके हैं, इसीलिए उन्हें लगता है कि सरदार पटेल की इस मूर्ति को बनाने का मौका उन्हें ही मिलेगा।महाराष्ट्र के धूलिया गांव से संबंध रखने वाले राम :89: महात्मा गांधी से बेहद प्रभावित हैं और उन्होंने गांधी की बहुत सी मूर्तियां बनाई हैं। संसद भवन की ध्यान मुद्रा वाली मूर्ति के अलावा पटना के गांधी मैदान में लगी विश्व की सबसे उंची गांधी प्रतिमा भी उन्होंने ही बनाई है। गांधी के बारे में एक संस्मरण सुनाते हुए राम कहते हैं, ‘‘मैं बहुत छोटा था जब गांधीजी हमारे गांव आए थे।उन दिनों विदेशी कपड़ों की होली जलाने का कार्यक्रम चल रहा था और मैं भी उसे देखने के लिए वहीं खड़ा था।उस समय मैंने जो टोपी पहनी हुई थी, उसके बारे में लोगों ने कहा कि यह भी विदेशी है तो मैंने उसे भी उतारकर आग के हवाले कर दिया।’’ उन्होंने बताया कि तभी से गांधीजी का उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। गांधी की विभिन्न मुद्राओं में उनके द्वारा बनाई गईं 200 से भी ज्यादा प्रतिमाएं सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी कई जगह स्थापित की गई हैं।विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा बनाने की ख्वाहिश रखने वाले राम को 1999 में पदमश्री से नवाजा गया था।उनकी दिली इच्छा है कि दिल्ली के इंडिया गेट पर उनकी बनाई गांधीजी की प्रतिमा लगे, जो विश्व को शांति का संदेश दे। राम ने कहा कि मौजूदा सरकार के इंडिया गेट के आसपास स्मारक बनाने के विचार का वह स्वागत करते हैं और उसके लिए उनके पास भी कुछ सुझाव हैं।जीवनभर जाने माने लोगों को अपने सधे हुए हाथों से पत्थरों में ढालने वाले राम उम्र के इस पड़ाव में भी काम करने की इच्छा को ही अपनी प्रेरणाशक्ति बताते हैं।संपादकीय सहयोग-अतनु दास





     

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