08 Apr 2020, 21:45 HRS IST
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  • सिनेमा अपना ‘साहित्य’ खुद गढ़ रहा है : स्वानंद किरकिरे
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  •                            दीपक सेन 

    नयी दिल्ली, एक अप्रैल :भाषाः तीन बरस के भीतर दो बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने वाले अलहदा नगमानिगार स्वानंद किरकिरे का कहना है कि वर्तमान दौर में फिल्में अपना साहित्य खुद गढ़ रही हैं और अब अच्छे सिनेमा को साहित्य की दरकार नहीं है।
    स्वानंद ने ‘भाषा’ से मुंबई से फोन पर बातचीत में कहा, ‘‘हम एक ऐसे दौर में रह रहे है जब देश का युवा ना केवल अंग्रेजी बल्कि कोरियाई फिल्म भी देखता है। ऐसे वक्त में सिनेमा का अपना भी साहित्य हो सकता है। अब यह कहना मुनासिब नहीं है कि अच्छी फिल्में बनाने के लिए केवल साहित्य जरूरी है।’’ उन्होंने कहा कि लोग किसी भी चीज में कलात्मकता खोज लेते हैं और काव्यकला कहां मिल जाए, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। कौन सा गाना अमर होगा, इसका फैसला वक्त करता है।
    एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अजीम शाहकारों जैसे साहिर, शैलेन्द्र, नीरज आदि के गीतों में साहित्य का पुट होता था। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इन हर दिल अजीज रचनाकारों के बस कुछेक नग्में ही आम लोगों को याद हैं। इसलिए इस तरह की तुलना सही नहीं है। इस वक्त कई गुना ज्यादा गीतों को रचा जा रहा है, तो स्वाभाविक है कि लोगों की जबान पर चुनिंदा गीत ही बरसों बरस याद रहेंगे।’’ 
    स्वानन्द किरकिरे गीतकार, पार्श्वगायक एवं लेखक होने के साथ-साथ हिन्दी सिनेमा एवं दूरदर्शन सीरियल कहानीकार, सहायक निर्देशक एवं संवाद लेखक हैं।
    किरकिरे को 2007 में फ़िल्म लगे रहो मुन्ना भाई के गीत ‘‘बंदे में था दम...वन्दे मातरम" के लिये और 2009 में फिल्म ‘थ्री ईडियट्स’ के गीत "बहती हवा सा था वो..." के लिये राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका हैं। इसके अलावा 2005 में फ़िल्म परिणीता के गीत "पियु बोले" के लिये नामांकन मिला था।
    आमिर खान के शो ‘सत्यमेव जयते’ के लिए लिखे गये गीत ‘ओ री चिरैया’ के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उस वक्त भ्रूण हत्या पर गीत लिखने को कहा गया था। इस विषय पर काफी कुछ लिखा जा रहा है। मैंने अपनी संवेदनशीलता के साथ इस गीत को रचा था। लेकिन मुझे लगता है कि मेरा यह गीत उस दिन सफल होगा जब हिन्दुस्तान में कन्या भ्रूण हत्या जैसा अपराध नहीं होगा।’’ किरकिरे की कलम में वह जादू है कि उनके गीत सीधे दिल तक पहुंचते हैं। अपने गीतों की असरदार खूबी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण यह है कि वह थियेटर से जुड़े रहे हैं, जहां सामने बैठे लोगों से सीधे संवाद होने के कारण हर अदा में असर का हुनर अपने आप आ जाता है। वह अभिनय, लेखन, गीत, संगीत सभी विधाओं में माहिर हैं और फिल्म से जुड़ी सभी चीजें इसी का हिस्सा हैं।
    इसके साथ ही उनका मानना है कि कलाकार का अपनी माटी से जुड़ाव बना रहना चाहिए ताकि उसकी गहराई बनी रहे। मेरा संबंध कबीर और कुमार गंधर्व की भूमि मालवा से है, कुछ तो उसका भी असर है।
    हालिया प्रोजेक्ट के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हाल में आयी फिल्म ‘पैडमैन’ की पटकथा लिखी थी। इस वक्त एक फिल्म के गीत लिख रहा हूं। इसके अलावा अपनी होम प्रोडक्शन की पहली फिल्म की पटकथा भी लिख रहा हूं।’’ 

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