05 Jun 2020, 00:25 HRS IST
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    कोरोना वायरस के मद्देनजर नयी दिल्ली में लोग एहतियात बरतते हुये
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    चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस की जांच करते चिकित्साकर्मी
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  • कड़े इम्तहान से गुजरा तब बने मिजाज वाले गीत : नीरज
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  • face="Times New Roman"> नीरज को फिल्मी दुनिया से बांध कर नहीं रख सकी। इस मशहूर गीतकार ने जब फिल्म उद्योग का रूख किया तो शुरूआत में सचिन देव बर्मन जैसे संगीतकारों ने उन्हें हर कसौटी पर कसा, लेकिन बाद में उन्हीं के साथ कई यादगार गीत भी उन्होंने किये। गोपालदास नीरज ने भाषा को दिए एक इंटरव्यू में बताया, ‘‘ मैं शायद उनके लिए फिल्म उद्योग के लिए अनफिट हो गया था। दूसरे सचिन देव बर्मन और शंकर-जयकिशन जैसे संगीतकारों के किसी किसी कारण से फिल्मों में संगीत नहीं देने के बाद तो रूकने का मतलब ही नहीं था।’’ मुंबई फिल्म उद्योग में नीरजके नाम से गीत लिखने वाले इस गीतकार का ‘‘ कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे’’ गीत देश भर में लोकप्रिय हुआ। राजकपूर की मेरा नाम जोकरके लिए लिखा गया भाई जरा देख के चलोऔर प्रेम पुजारीका शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाबगीत हर खासो आम की जुबां पर चढ गये। देवआनंद के निधन से काफी दु:खी नीरज ने उनके साथ बिताये दिनों को याद करते हुए कहा, ‘‘ देव साहब नायाब शख्सियत थे। उन्होंने मुझे ब्रेक दिया। एस डी बर्मन से कहा कि एक बार इसे आजमा कर देखो तो बड़ी मुश्किल से बर्मन साहब ने मेरे गीतों को स्वीकार किया।’’ उन्होंने कहा कि देव साहब और बर्मन ने उनके साथ कई तरह के प्रयोग किये और बर्मन तो उन्हें अकसर इतनी कडी और आडी तिरछी धुनें देते थे कि कई बार लिखना मुश्किल लगता था लेकिन आखिर में निभा ले गया। नीरज ने बताया, ‘‘ हिन्दी फिल्मों में राजकपूर ने भी गीत संगीत को लेकर काफी प्रयोग किये मेरा नाम जोकर के लिए जब भाई जरा देख के चलो लिखा गया तो उसमें पूरे जीवन का दर्शन था ये दुनिया सर्कस है और हम सब जोकर वो : ईश्वर : नचा रहा है ’’ उन्होंने कहा कि उस जमाने में कई बार हम गीतकार संगीत रचना में भी काफी मददगार होते थे ‘‘ ये काम बर्मन साहब के साथ खूब किया वो मुझे घर बुला लेते थे और वहां बैठकर हमने कई यादगार गीत इंडस्ट्री को दिये ’’ ‘ शर्मीली के आज मदहोश हुआ जाए रे और खिलते हैं गुल यहां जैसे यादगार गीत लिख चुके नीरज ने बताया कि आजकल का संगीत कानफोडू हो गया है और गीत के बोल तो समझिये पता ही नहीं चलता कि कौन क्या कहना चाह रहा है और मकसद क्या है । उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने भी तोड़ मरोड़ के कई गीत लिखे लेकिन भाषा के साथ कभी समझौता नहीं किया और सरल से सरल शब्द गीतों में फिट करने की कोशिश की ताकि अनपढ आदमी को भी आसानी से समझ सके ’’ नीरज के गीतों को लता मंगेशकर, किशोर कुमार, मुहम्मद रफी और मन्ना डे सहित उस जमाने के सभी मशहूर फिल्मी गायकों ने सुर दिए किशोर का गाया फूलों के रंग से और धीरे से जाना खटियन में ’, लता का गाया राधा ने माला जपी श्याम की और रंगीला रे ’, रफी का गाया लिखे जो खत तुझे और मन्ना डे का गाया भाई जरा देख के चलो ’... ये कुछ ऐसे गीत इस फनकार ने लिखे हैं जो वक्त की बंदिशों से परे जा चुके हैं

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