08 Apr 2020, 22:20 HRS IST
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  • सुनामी के बाद सीपों का जीवन खतरे में : वैज्ञानिक
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  • अलग अलग गहराई पर समुद्र के अंदर पैदा होने वाली वनस्पतियां और उस पर आधारित जन जीवन प्रभावित हुआ है।’’विनीत कुमार ने कहा कि जिन स्थानों पर मूंगों तक रोशनी ज्यादा पहुंचने लगी है वह मूंगे खराब :कोरल ब्लीचिंग: होने लगे हैं। उन्होंने कहा कि मूंगों के नये संजाल के पूरी तरह बनने में लगभग 30 साल लगते हैं और तभी स्थितियां सामान्य होने की ओर लौटेंगी।डा सोनकर ने कहा कि समुद्र तल में आये इन बदलावों के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं क्योंकि बहुमूल्य मोती बनाने वाली सीपों का जीवन खतरे में है। इस सीप की एक जबर्दस्त खूबी यह भी है कि सीप अपने खाने की प्रक्रिया में पानी को फिल्टर करके उसे शुद्ध करता रहता है और एक दिन में लगभग 95 लीटर पानी को शुद्ध कर देता है जो कोरलों और अन्य समुद्री जीवों के फलने फूलने के लिए उपयुक्त वातावरण का निर्माण करता है।
    उल्लेखनीय है कि सीप पानी में आक्सीजन की कमी को दूर करता है, अतिरिक्त नाइट्रोजन को हटा देता है, हानिकारक प्रदूषण को पानी से दूर करता है यहां तक कि पानी से भारी धातुओं को हटा देता है और उसकी गंदगी को खत्म करता है जिससे समुद्र में ज्यादा गहराई तक सूर्य की रोशनी पहुंचती है और समुद्र में अलग अलग जलस्तर पर प्रकाश संष्लेषण के माध्यम से अलग अलग वनस्पतियां जन्म लेती हैं और जिनके कारण अलग अलग गहराइयों पर रहने वाले जीव जीवित रहते हैं।डा सोनकर ने कहा कि समुद्री जीवन के संतुलन को बरकरार रखने के लिए विदेशों में कोरल नर्सरी स्थापित की जाती हैं और कुछ इस तरह के प्रयास हमें भी अभी से करने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर इस दिशा में युद्धस्तर पर प्रयास नहीं किये गये तो समुद्र के भीतर हो रहे बदलाव का मानव जीवन पर दीर्घकालिक गंभीर परिणाम हो सकता है।संपादकीय सहयोग-अतनु;दास

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