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  • कानून के शासन पर आधारित वैश्विक व्यवस्था के सामने खड़ी हैं चुनौतियां: ओबामा

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 10:52 HRS IST

शिकागो, 11 जनवरी :भाषा: कानून के शासन, मानवाधिकारों, बोलने, एकत्र होने और धर्म की स्वतंत्रताओं के शासन के साथ-साथ स्वतंत्र प्रेस की नींव पर खड़ी वैश्विक व्यवस्था के सामने अब हिंसक फासीवादी और विदेशी राजधानियों में मौजूद तानाशाह चुनौती पेश कर रहे हैं।

राष्ट्रपति के रूप में देश को अपना अंतिम संबोधन देते हुए ओबामा ने कहा कि अपने लोकतांत्रिक मूल्यों के कारण अमेरिका ‘‘ने महामंदी के दौरान फासीवाद के प्रलोभन और अत्याचार का विरोध किया और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अन्य लोकतंत्रों के साथ मिलकर एक व्यवस्था कायम की। ऐसी व्यवस्था, जो सिर्फ सैन्य ताकत या राष्ट्रीय संबद्धता पर नहीं बल्कि सिद्धांतों, कानून के शासन, मानवाधिकारों, धर्म, भाषण, एकत्र होने की स्वतंत्रताओं और स्वतंत्र प्रेस पर आधारित थी।’’ अपने गृहनगर से जनता को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा, ‘‘उस व्यवस्था के सामने अब चुनौती पेश की जा रही है। यह चुनौती सबसे पहले उन हिंसक फासीवादियों की ओर से पेश आ रही है, जो इस्लाम के लिए बोलने का दावा करते हैं। सबसे हालिया चुनौती विदेशी राजधानियों में उन तानाशाहों की ओर से पेश की जा रही है, जो मुक्त बाजारों, मुक्त अर्थव्यवस्थाओं और नागरिक समाज को अपनी सत्ता के लिए एक खतरे के रूप में देखते हैं।’’ ओबामा ने कहा, ‘‘जो खतरा ये दोनों पेश कर रहे हैं, इसका कुप्रभाव किसी कार बम या मिसाइल से कहीं ज्यादा है। यह बदलाव के डर, अलग तरह से दिखने, बोलने या पूजा करने वाले लोगों से लगने वाले डर, नेताओं को जवाबदेह ठहराने वाले कानून के शासन की अवहेलना, विरोध एवं मुक्त विचार के प्रति असहिष्णुता को पेश करता है। यह मानता है कि तलवार या बंदूक, बम या दुष्प्रचार ही अंत में यह निर्णय कर सकते हैं कि क्या सच है और क्या सही है।’’ राष्ट्रपति पद पर ओबामा का कार्यकाल 20 जनवरी को खत्म हो रहा है। उनके बाद रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति होंगे।

जारी

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