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  • नोटबंदी के बाद विश्वबैंक ने भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर सात प्रतिशत किया

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 12:13 HRS IST

:ललित के झा: वाशिंगटन , 11 जनवरी :भाषा : विश्वबैंक ने नोटबंदी के बाद चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के बारे में अपने अनुमान को घटा दिया है पर उसके अनुसार अब भी यह सात प्रतिशत के ‘मजबूत’ स्तर पर रहेगी। पहले का अनुमान 7.6 प्रतिशत था।

साथ ही विश्वबैंक ने यह भी कहा है कि आने वाले वषरें में देश की वृद्धि अपनी तेज लय पकड़ लेगी और 7.6 और 7.8 प्रतिशत के स्तर को पुन: प्राप्त कर लेगी।

विश्वबैंक की एक ताजा रपट में कहा गया है कि बड़े मूल्य के नोटों को तत्काल चलन से हटाने के सरकार के नवंबर के निर्णय से ‘वर्ष 2016 में अर्थिक वृद्धि धीमी पड़ी है।’ पर रपट में कहा गया है कि धीमी पड़ने के बावजूद भारत की वृद्धि दर मार्च 2017 को समाप्त होने जा रहे वित्त वर्ष में अब भी मजबूत 7 प्रतिशत तक रहेगी।

रपट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में कमी और कृषि उत्पाद में ठोस वृद्धि से नोटबंदी की चुनौतियांे का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

इस तरह भारत चीन से आगे निकल कर सबसे तीव्र वृद्धि कर रही प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

विश्वबैंक को ‘ उम्मीद ’ है कि वर्ष 2017-18 में गति पकड़ कर भारत की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत और 2019-20 में 7.8 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। उसका कहना है कि सरकार द्वारा शुरू किए गए विभिन्न सुधारों से घरेलू आपूर्ति की अड़चने दूर होंगी और उत्पादकता बढ़ेगी। बुनियादी ढ़ांचे पर खर्च बढ़ने से कारोबार का वातावरण सुधरेगा और निकट भविष्य में अधिक निवेश आएगा।

रपट में यह भी कहा गया है कि मेक इन इंडिया अभियान से देश के विनिर्माण क्षेत्र को मदद मिलेगी। इस क्षेत्र को घरेलू मांग और नियमों में सुधार का भी फायदा होगा। मंहगाई दर में कमी और सरकारी कर्मचारियों के वेतन मान में सुधार से भी वास्तविक आय और उपभोग के बढने में मदद मिलेगी। इसी संदर्भ में अनुकूल वष्रा और बेहतर कृषि उपज का भी उल्लेख किया गया है।

जारी

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