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  • यरुशलम को लेकर संरा सुरक्षा परिषद की बैठक शुक्रवार को

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 15:29 HRS IST

संयुक्तराष्ट्र, सात दिसंबर (भाषा) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यरुशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने की घोषणा के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को एक आपात बैठक बुलाई है।

ट्रंप ने दशकों पुरानी अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय नीति को पलटते हुए यरूशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर मान्यता दे दी। उन्होंने इसके साथ ही विदेश मंत्रालय को यरूशलम में अमेरिकी दूतावास के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्देश दिया।

सुरक्षा परिषद के 15 में से कम से कम आठ सदस्यों ने वैश्विक निकाय से एक विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। बैठक की मांग करने वाले देशों में सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्य देश ब्रिटेन और फ्रांस तथा बोलीविया, मिस्र, इटली, सेनेगल, स्वीडन, ब्रिटेन और उरुग्वे जैसे अस्थायी सदस्य शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के शुक्रवार को सुरक्षा परिषद को संबोधित करने की संभावना है।

इससे पहले गुतारेस ने कहा था कि इस मुद्दे को सीधी बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘इस गंभीर चिंता के समय, मैं यह साफ करना चाहूंगा कि द्वि-राष्ट्र समाधान का कोई और विकल्प नहीं है।’’ गुतारेस ने कहा कि इस्राइली और फलस्तीनियों की शांति की संभावना पर ‘‘संकट’’ उत्पन्न करने वाले एकतरफा उपायों के खिलाफ उन्होंने हमेशा आवाज उठाई है।

महासचिव ने कहा, ‘‘यरुशलम एक अंतिम स्थिति मुद्दा है जिसे इस्राइल और फलस्तीन की वैध चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के बीच सुरक्षा परिषद एवं महासभा के प्रस्तावों के आधार पर सीधी बातचीत के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए।’’ यरूशलम को इस्राइल की राजधानी घोषित करने के ट्रंप के निर्णय से कई देश नाराज हो गए हैं। अमेरिका के कई सहयोगियों ने विवादास्पद निर्णय के लिए ट्रंप की आलोचना की है।

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने कहा कि अंतिम स्थिति समझौते से पहले अमेरिका की यरुशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने की घोषणा और अमेरिकी दूतावास को वहां स्थानांतरित करने के कदम से वह सहमत नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में शांति की संभावनाएं तलाशने की दिशा में यह मददगार साबित नहीं होगा। इस्राइल के लिए ब्रिटेन का दूतावास तेल अवीव में स्थित है और उसे वहां से स्थानांतरित करने का हमारा कोई इरादा नहीं है।’’ मे ने कहा कि यरुशलम की स्थिति पर इस्राइलियों और फलस्तीनियों के बीच बातचीत से फैसला किया जाना चाहिए।

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