18 Oct 2018, 23:23 HRS IST
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  • भारत के सौंवे उपग्रह कार्टोसैट-2 का सफल प्रक्षेपण, 30 अन्य उपग्रह भी प्रक्षेपित

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 15:57 HRS IST

\R

(एस\R. विजय\R कार्तिक\R)

श्रीहरिकोटा\R (आंध्र\R प्रदेश\R), 12 जनवरी\R (भाषा\R) अंतरिक्ष\R क्षेत्र\R में\R अपनी\R वाणिज्यिक\R योग्यता\R का\R भारत\R ने\R आज\R फिर\R एक\R बार\R लोहा\R मनवाया।\R भारतीय\R अंतरिक्ष\R अनुसंधान\R संगठन\R (इसरो\R) ने\R आज\R मौसम\R की\R निगरानी\R करने\R वाले\R कार्टोसैट\R-2 उपग्रह\R का\R पीएसएलवी\R सी\R-40 प्रक्षेपण\R यान\R से\R सफल\R प्रक्षेपण\R किया। इसके साथ ही इसरो ने अपने उपग्रहों के प्रक्षेपण का शतक पूरा किया है।

आज के अभियान में कार्टोसेट के साथ \R30 अन्य\R उपग्रहों\R को\R भी अतरिक्ष की\R कक्षाओं में\R सफलतापूर्वक पहुंचाया गया। इनमें 28 विदेशी उपग्रह हैं।\R

यह\R पीएसएलवी\R का\R अब\R तक\R का\R सबसे\R लंबा\R मिशन\R बताया जा रहा\R है।\R गौरतलब है कि गत\R अगस्त\R में\R इसरो\R का आईआरएनएसएस\R-1एच के प्रक्षेपण \R का\R मिशन\R विफल\R रहा\R था।\R इसे\R पीएसएलवी\R-39 से\R प्रक्षेपित\R किया\R गया\R था।\R उस विफलता की\R वजह थी कि\R रॉकेट\R के\R चौथे\R चरण\R में\R उपग्रह\R ताप अवरोधक आवरण (हीट\R शील्ड\R ) उससे\R अलग\R नहीं\R हुआ तथा उपग्रह उसमें अटक गया। \R

प्रधानमंत्री\R नरेंद्र\R मोदी\R ने\R पीएसएलवी\R सी\R-40 के\R सफल\R प्रक्षेपण\R पर\R इसरो\R के\R वैज्ञानिकों\R को\R बधाई\R दी है।\R

मोदी\R ने\R एक\R ट्वीट\R में\R कहा\R, ‘‘ इसरो\R का\R अपने\R 100वें\R उपग्रह\R को\R छोड़ना\R इसकी\R महानतम\R उपलब्धियों\R के\R साथ\R ही\R भारत\R के\R अंतरिक्ष\R कार्यक्रम\R के\R उज्ज्वल\R भविष्य\R को\R रेखांकित\R करता\R है।\R’’

इसरो\R अध्यक्ष\R के\R तौर\R पर\R अपने\R अंतिम\R मिशन\R पर\R किरण\R कुमार\R ने\R कहा\R कि\R कार्टोसैट\R-2 उपग्रह\R को\R देश\R के\R लिए\R नए\R साल\R के\R एक\R तोहफे\R के\R रुप\R में\R सफलतापूर्वक\R प्रक्षेपित\R करते\R हुए\R वह\R बहुत\R खुश\R हैं।\R

उन्होंने\R मिशन\R के\R नियंत्रण\R कक्ष\R में\R कहा\R, ‘‘ इसरो\R ने\R 2018 की\R शुरुआत\R सफल\R प्रक्षेपण\R से\R की\R है।\R सभी\R वाणिज्यिक\R (कार्टोसैट\R और\R नैनोसैट\R के\R अलावा\R) उपग्रह\R और\R एक\R घंटे\R बाद\R छोड़ा\R जाने\R वाला\R माइक्रोसैट\R सफल\R रहा\R है।\R अब\R तक\R कार्टोसैट\R का\R प्रदर्शन\R संतोषजनक\R रहा\R है।\R’’

कुमार\R ने\R कहा\R कि\R पिछले\R मिशन\R में\R हीट\R शील्ड\R की\R समस्या\R सामने\R आयी\R थी\R और\R इसरो\R की\R एक\R समिति\R ने\R इस\R पर\R विचार\R कर\R इसके\R समाधान\R को\R सुनिश्चित\R करने\R के\R लिए\R कदम\R उठाए।\R

इसरो\R का\R आज\R का\R मिशन\R ऐतिहासिक\R है\R क्योंकि\R तीन\R भारतीय\R प्रक्षेपण\R यानों\R के\R उड़ान\R भरने\R के\R साथ\R भारत\R ने\R एक\R माइक्रो\R सैटेलाइट\R छोड़ा\R और\R यह\R इसरो\R के\R उपग्रह\R केंद्र\R परिसर\R (आईसैक\R) से\R प्रक्षेपित\R होने\R वाला\R 100वां\R उपग्रह\R है।\R

इस\R महीने\R सेवानिवृत्त\R होने\R जा\R रहे\R कुमार\R ने\R कहा\R कि\R मौसम\R निगरानी\R, नेविगेशन\R और\R प्रयोगात्मक\R उपग्रहों\R के\R साथ\R इसरो\R के\R इन\R 100 उपग्रहों\R में\R नैनो\R और\R माइक्रो\R उपग्रह\R भी\R शामिल\R है\R जिन्हें\R देश\R में\R शिक्षण\R संस्थानों\R में\R बनाया\R गया\R है।\R

पीएसएलवी\R सी\R-40 ने\R पहली\R उड़ान\R सुबह\R नौ\R बजकर\R 28 मिनट\R पर\R भरी\R और\R मात्र\R 17 मिनट\R बाद\R ही\R इसने\R कार्टोसैट\R-2 उपग्रह\R और\R 28 अन्य\R वाणिज्यिक\R उपग्रहों\R को\R एक\R-एक\R करके\R सफलतापूर्वक\R कक्षा\R में\R स्थापित\R करना\R शुरु\R कर\R दिया।\R

इससे\R पहले\R 44.4 मीटर\R लंबे\R पीएसएलवी\R सी\R-40 की\R 42वीं\R उड़ान\R का\R 28 घंटे\R का\R काउंटडाउन\R शुरु\R हुआ।\R

पीएसएलवी\R सी\R-40 ने\R सबसे\R पहले\R 710 किलोग्राम\R के\R कार्टोसैट\R-2 उपग्रह\R को\R 505 किलोमीटर\R दूर\R पृथ्वी\R की\R धु्वीय\R कक्षा\R में\R स्थापित\R किया।\R भारत\R के\R नैनो\R उपग्रह\R और\R छह\R देशों\R के\R 28 अन्य\R उपग्रहों\R का\R कुल\R वजन\R 613 किलोग्राम\R था।\R इन\R सभी\R को\R एक\R-एक\R करके\R करीब\R सात\R मिनट\R के\R भीतर\R उनकी\R कक्षा\R में\R स्थापित\R कर\R दिया\R गया।\R

इसके\R बाद\R इसरो\R द्वारा\R विकसित\R माइक्रो\R सैटेलाइट\R को\R कक्षा\R में\R स्थापित\R किया\R गया\R जिसके\R लिए\R पीएसएलवी\R सी\R-40 को\R 359.584 किलोमीटर\R तक\R नीचे\R लाया\R गया।\R

इसके\R बाद\R रॉकेट\R का\R चौथा\R चरण\R दुबारा\R शुरु\R हुआ\R और\R उसके\R उड़ान\R भरने\R के\R करीब\R 105 मिनट\R बाद\R इसे\R भी\R कक्षा\R में\R स्थापित\R कर\R दिया\R गया।\R रॉकेट\R का\R चौथा\R चरण\R करीब\R दो\R घंटे\R 21 मिनट\R बाद\R बंद\R हुआ\R और\R इस\R प्रकार\R यह\R इसरो\R का\R सबसे\R लंबा\R मिशन\R रहा।\R

ठीक\R इसी\R तरह\R की\R प्रक्रिया\R सितंबर\R 2016 में\R पीएसएलवी\R सी\R-35 के\R प्रक्षेपण\R के\R दौरान\R स्कैटसैट\R-1 को\R कक्षा\R में\R स्थापित\R करने\R के\R दौरान\R भी\R अपनायी\R गई\R थी।\R

वाणिज्यिक\R 28 अंतरराष्ट्रीय\R उपग्रहों\R में\R तीन\R माइक्रो\R और\R 25 नैनो\R-सैटेलाइट\R हैं।\R यह\R छह\R देशों\R कनाडा\R, फिनलैंड\R, फ्रांस\R, कोरिया\R, ब्रिटेन\R और\R अमेरिका\R के\R हैं।\R

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