19 Oct 2018, 08:54 HRS IST
  • कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल में पूजा करते श्रद्धालु
    कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल में पूजा करते श्रद्धालु
    महानवमी पर विंध्याचल धाम में  हवन करते भक्तगण
    महानवमी पर विंध्याचल धाम में हवन करते भक्तगण
    रांची: महानवमी के अवसर पर पूजन का दृश्य
    रांची: महानवमी के अवसर पर पूजन का दृश्य
    कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल का मनमोहक दृश्य
    कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल का मनमोहक दृश्य
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम अर्थ
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
add
add
  • केन्द्र मनरेगा के तहत अनुमानित मांग कम करने के लिये दबाव डाल रहा है: उच्चतम न्यायालय में लगा आरोप

  • विज्ञापन
  • [ - ] फ़ॉन्ट का आकार [ + ]
पीटीआई-भाषा संवाददाता 18:51 HRS IST



नयी दिल्ली, 13 फरवरी, (भाषा) उच्चतम न्यायालय में आज एक गैर सरकारी संगठन ने आरोप लगाया कि केन्द्र ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्यक्रमों के लिये धन की अनुमानित मांग कम करने के लिये राज्यों पर दबाव डाल रहा है जिसकी वजह से राज्य नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराने मे असमर्थ हैं।

न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर और न्यायमूर्ति एन वी रमण की पीठ को गैर सरकारी संगठन स्वराज अभियान के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केन्द्र महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के तहत धन की अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं कर सकता है। इस कानून के तहत प्रत्येक परिवार को साल में सौ दिन का रोजगार देने का प्रावधान है।

भूषण ने कहा, ‘‘आज आधे से अधिक राज्यों की सरकारों पर केन्द्र में काबिज पार्टी का नियंत्रण है। इसी वजह से केन्द्र ने राज्यों से कह रहा है कि कोष के बारे में अधिक आनाकानी नहीं करें। केन्द्र कह रहा है कि अगर आप इसके बारे में आनाकानी करेंगे तो हम बजट में कटौती कर देंगे।’’

उन्होंने कहा कि यदि साल में प्रति परिवार सौ दिन के रोजगार की सीमा पार करती है और सरकार सरकार धन को सीमित नहीं करती है तो बजटीय बाध्यता आ सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘केन्द्र राज्यों को अनुमानित मांग कम करने के लिये बाध्य कर रही है।’’ उन्होंने इस कानून के तहत औसतन रोजगार प्रति वर्ष सौ दिन से घटकर 40-45 दिन हो गया है।

भूषण ने इस मामले में आज अपनी दलीलें पूरी कर लीं। अब अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल पांच मार्च को अपनी दलीलें पेश करेंगे।

केन्द्र ने इससे पहले न्यायालय से कहा था कि ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिसमे उसने इस कानून के तहत रोजगार के अधिकतम दिनों को सीमित किया हो या राज्यों को धन उपलब्ध नहीं कराया हो।

केन्द्र ने कहा था कि 2016-17 के वित्तीय वर्ष में 20 राज्यों ने बजट की उस सीमा को पार किया था जिसके लिये सहमति बनीं थी और केन्द्र ने उन्हें धन उपलब्ध कराया था।

इस मामले में आज सुनवाई के दौरान भूषण ने पीठ से कहा कि अनेक राज्यों ने इस कानून के तहत अधिक धन मुहैया कराने के लिये केन्द्र को लिखा है क्योंकि मंजूर किया गया बजट खत्म होने के बाद राज्य लोगों को रोजगार नहीं प्रदान कर सकते।

उन्होंने कहा कि 2017-18 में कुल 48,500 करोड़ रूपए की राशि आबंटित की गयी थी।

  • अपनी टिप्पणी पोस्ट करे ।