15 Nov 2018, 12:29 HRS IST
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  • केदारनाथ, यमुनोत्री के कपाट शीतकाल के लिए बंद

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 18:11 HRS IST



देहरादून, नौ नवंबर :भाषा:
उच्च हिमालयी क्षेत्र स्थित केदारनाथ और यमुनोत्री धामों के कपाट आज भैयादूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए ।



भगवान शिव को समर्पित ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट विधिवत पूजा अर्चना के बाद सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए । अब अगले छह माह के दौरान श्रद्धालु उनके दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थल उखीमठ में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में कर सकेंगे ।

श्री केदारनाथ बद्रीनाथ मंदिर समिति के जनसंपर्क अधिकारी हरीश गौड़ ने बताया कि कपाट बंद होने की प्रक्रिया सुबह चार बजे से केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह में भगवान की विशेष पूजा के साथ शुरू हुई जिसे मंदिर के मुख्य पुजारी टी. गंगाधर लिंग ने अपने सहयोगियों के साथ संपन्न किया ।

कपाट बंद होने के मौके पर परम्परागत वाद्य यंत्रों और सेना के बैंड की मधुर धुनों तथा बाबा केदार के जयकारों से केदार पुरी का वातावरण भक्तिमय हो उठा ।

बाद में सुहावने मौसम में बाबा केदार की उत्सव डोली उखीमठ के लिये रवाना हुई जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल उनके साथ चलते रहे । उत्सव यात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरती हुई तीन दिन बाद गंतव्य तक पहुंचेगी ।

दूसरी ओर, उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम के कपाट भी शुक्रवार दोपहर सवा बारह बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए ।



यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन उनियाल ने बताया कि वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान व पूजा अर्चना के बाद शुभ मुहूर्त पर दोपहर 12:15 बजे यमुना जी का मुकुट उतारकर धाम के कपाट बंद कर दिए गए ।



पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच मां यमुना की डोली के मंदिर से बाहर निकलते ही यमुना के जयकारों से यमुनोत्री धाम का पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसके बाद शनिदेव की अगुआई में पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ यमुना की डोली शीतकालीन प्रवास खरसाली के लिए रवाना हुई जहां अगले छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे ।



गंगोत्री धाम के कपाट कल बंद हुए थे जबकि बदरीनाथ के कपाट 20 नवंबर को बंद होंगे ।



गढ़वाल हिमालय में स्थित सभी चारों धामों— बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री— के भीषण ठंड और बर्फबारी की चपेट में रहने के कारण उनके कपाट हर साल अक्टूबर नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल अप्रैल—मई में दोबारा खोल दिए जाते हैं ।

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