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  • सहकारिता आंदोलन को मजबूती देने को सरकार प्रतिबद्ध: कृषिमंत्री

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 18:40 HRS IST

नयी दिल्ली, 14 नवंबर (भाषा) भारत में सहकारी उद्यमों को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बुधवार को यहां कहा कि सरकार ने इसके लिए 100 करोड़ रुपये की सहकारी उद्यम सहयोग एवं नवाचार योजना शुरु की है।

राजधानी में भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा आयोजित ‘‘ 65वें अखिल भारतीय सहकारिता सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री सिंह ने कहा, ‘‘केन्द्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये के कोष के साथ सहकारी उद्यम सहयोग एवं नवाचार योजना शुरु की है जिसे बाद में बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये किया जायेगा।’’

उन्होंने सहकारिता आंदोलन की बुनियाद और मजबूत बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को महिला, विकलांग या कमजोर वर्ग के सहकारी उद्यमों को तीन करोड़ तक की रिण सहायता देने का अधिकार दिया है। पहले इस पर एक करोड़ रुपये की सीमा थी।

उन्होंने कहा कि केंद्र सहकारी संस्थाओं में सुधार एवं नवाचार के तहत उन्हें कंप्यूटरीकृत करने के लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में लगभग देश में लगभग आठ लाख सहकारी संस्थान हैं और इसकी ताकत इतनी है कि सही तरीके से काम होने पर यह देश की तस्वीर बदल सकते हैं।

इस मौके पर एनसीयूआई के अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह यादव ने कहा, ‘‘देश् में सहकारिता आंदोलन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ नारे के अनुरूप है और यह किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में अग्रसर है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सहकारिता आंदोलन का मूलभूत सिद्धांत शिक्षण और प्रशिक्षण साथ साथ चलाना रहा है। लेकिन हाल के दिनों में सरकार की ओर से इसे अलग अलग करने की कोशिश की गई जो सहकारिता आंदोलन को नुकसान पहुंचायेगा। सरकार को इस दिशा में सोचना होगा।’’

उल्लेखनीय है कि एनसीयूआई की एक सहकारिता प्रशिक्षण कार्यो में संलिप्त इकाई एनसीसीटी को मूल संस्थान से अलग करने का विवाद उच्च न्यायालय के विचाराधीन है।

उन्होंने सहकारिता आंदोलन को गति देने के लिए राष्ट्रीय सहकारी नीति बनाये जाने की वकालत करते हुए इस बात पर चिंता व्यक्त की सहकारिता इकाइयों में पारदर्शिता के अभाव और संचालन में खामियों वजह से बहुत सी सहकारी संस्थायें बंद हो गई हैं। पहले 75 प्रतिशत सहकारिता इकाइयां रिण देने के कारोबार में लगी थी लेकिन अब ऐसी इकाइयों का अनुपात घटकर 15 - 16 प्रतिशत रह गया है और वाणिज्यिक बैंकों ने उनकी लगह ले ली है।

उन्होंने देश में खाद्यान्न वितरण, रिण वितरण एवं उत्पादन के क्षेत्र में सहकारिता की अभूतपूर्व भूमिका को रेखांकित करते हुए इसे और मजबूत बनाने की वकालत की।

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