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  • ‘बिना बिके मकानों के अनुमानित किराये पर कर छूट से केवल बड़े शहरों के डेवलपरों को फायदा’

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 19:43 HRS IST



नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) कमजोर मांग के चलते छह से सात लाख बिना बिके मकानों के अनुमानित किराये पर लगने वाले कर से राहत बढ़ाकर दो साल किए जाने पर रीयल्टी क्षेत्र के डेवलपरों ने राहत की सांस ली है। रीयल्टी क्षेत्र लंबे समय से नकदी के संकट से जुझ रहा है। हालांकि उनका मानना है कि इस छूट का ज्यादातर लाभ सात-आठ बड़े शहरों के डेवलपरों को होगा।

डेवलपरों और संपत्ति सलाहकारों का मानना है कि अंतरिम बजट के इस प्रस्ताव का लाभ अधिकतर दिल्ली-एनसीआर और मुंबई मेट्रोपोलिटन क्षेत्र जैसे सात-आठ बड़े शहरों के डेवलपरों को होगा, क्योंकि सबसे ज्यादा बिना बिके मकान इन्हीं शहरों में मौजूद है।

वित्त वर्ष 2019-20 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने गैर-बिके मकानों पर अनुमानित किराये पर लगने वाले कर से मिलने वाली छूट को एक साल से बढ़ाकर दो साल करने का प्रस्ताव किया है। इसकी गणना परियोजना खत्म होने वाले साल के अंत से की जाएगी।

इस प्रस्ताव पर एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, ‘‘ यह एक स्वागत योग्य कदम है और इससे आवासीय क्षेत्र को फायदा होगा। मौजूदा समय में देश के शीर्ष सात शहरों में 6.73 लाख बिना बिके मकान हैं। इसमें दिल्ली-एनसीआर में 1,86,710 और मु्ंबई क्षेत्र में 2,19,490 मकान बचे हुए हैं।

मोतीलाल ओसवाल रीयल एस्टेट फंड के प्रमुख शरद मित्तल ने कहा कि डेवलपरों के लिए यह एक बड़ी राहत है। इससे उन्हें अपने बिना बिके मकानों को बाजार में बेचने के लिए और अधिक समय मिलेगा।

महागुन के निदेशक धीरज जैन के अनुसार यह डेवलपरों के लिए एक राहत भरा कदम है।

सुमधुरा समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मधूसूदन जी ने कहा कि यह प्रस्ताव ‘आंशिक राहत’ देने वाला है।

इसके अलावा रीयल्टी डेवलपरों ने कहा कि दूसरे घर की खरीद पर प्रोत्साहन और पांच लाख रुपये तक की कर योग्य आय को आयकर से छूट देने के प्रस्ताव पर भी खुशी जाहिर की।

सेंचुरी रीयल एस्टेट के प्रबंध निदेशक रविंद्र पई ने कहा, ‘‘यह बजट मुख्य तौर से मध्यवर्ग पर केंद्रित है। मुझे उम्मीद है कि इस अतिरिक्त खर्च योग्य आय के बढ़ने से रीयल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारी बढ़ेगी और इससे क्षेत्र में मांग बढ़ेगी।’’

गौर्स के प्रबंध निदेशक मनोज गौर और गुलशन होम्ज के निदेशक दीपक कुमार ने कहा कि पांच लाख रुपये तक की कर योग्य आय पर पूर्ण कर छूट देने के प्रस्ताव से लोगों की क्रयशक्ति बढ़ेगी और अब हो सकता है कि वह घर खरीदने के बारे में सोचें।

प्रतीक समूह के चेयरमैन प्रशांत तिवारी ने कहा कि लाभ पर 100 प्रतिशत कटौती से रीयल्टी कंपनियों को अगले वित्त वर्ष में सस्ते आवास बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे सस्ते आवासों की उपलब्धता बढ़ेगी।

अजनारा समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अशोक गुप्ता ने कहा कि पांच लाख रुपये तक की कर योग्य आय को आयकर छूट देने के प्रस्ताव से लोगों को अपने खुद के घर का सपना पूरा करने में मदद मिलेगी।

सिग्नेचर ग्लोबल के चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि आयकर की धारा 80 आईबीए के तहत कर कटौती का लाभ हासिल करने के लिए किफायदी आवास निर्माण परियोजनाओं के लिए मंजूरियां हासिल करने की अवधि एक साल बढ़ा कर 31 मार्च 2030 किए जाने के प्रस्ताव को सस्ते आवासों की उपलब्धता बढ़ाने में मददगार बताया।

स्क्वायर यार्ड्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तनुज शौरी ने कहा कि बजट में रीयल एस्टेट क्षेत्र की कुछ दुखती रगों पर निश्चित तौर पर राहत का मरहम लगाया गया है।

ट्यूलिप इंफ्राटेक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक प्रवीण जैन ने बजट में किए गए आयकर छूट प्रस्तावों को खरीदार के अनुकूल बताया।

चिंटेल्स के प्रबंध निदेशक प्रशांत सोलोमन ने कहा कि चुनावी साल का बजट में रीयल एस्टेट क्षेत्र के लिए कुछ राहत लेकर आया है। हमें आने वाले अच्छे समय की उम्मीद है, आखिर हम देश के सबसे बड़े रोजगार निर्माता क्षेत्रों में से एक हैं।

हवेलिया के चेयरमैन रतन हवेलिया ने कहा कि बजट में आवास क्षेत्र की कुछ चुनौतियों से आंशिक तौर पर निपटने का प्रयास किया गया है। यह खरीदारों को कुछ राहत देगा और यह बिल्डरों के लिए अच्छा है।

रुस्तमजी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक बोमन आरॅ ईरानी ने कहा कि बजट ने दूसरे घर की खरीद के बाजार में निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव किया है।

सेंट्रल सेक्रेटेरिएट सर्विस ऑफीसर्स सोसायटी के अध्यक्ष नेह श्रीवास्तव ने कहा कि बजट में घर खरीदारों और डेवलपरों के लिए कई प्रोत्साहन दिए गए हैं।

नो ब्रोकर डॉट कॉम के सह-संस्थापक सौरभ गर्ग ने कहा कि बजट प्रस्तावों से घर खरीदारों, किरायेदारों और डेवलपरों के बोझ को कम करने की कोशिश की गई है।

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