15 Sep 2019, 19:40 HRS IST
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  • बजट योजनाओं के साथ बनाया गया है, इसमें सभी अनुमान व्यवहारिक है: सीतारमण

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 15:47 HRS IST

नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि 2019-20 के बजट में प्रत्येक अनुमान व्यवहारिक है और इसमें कृषि और निवेश पर जोर से पांच साल में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार पांच साल में दोगुना कर 5,000 अरब डालर करने की बुनियाद तैयार की गयी है।

अपने पहले बजट पर राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों खासकर रक्षा, पेंशन और वेतन तथा आंतरिक सुरक्षा मदों पर व्यय के लिये बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं तथा इसके लिए जरूरी कर और गैर-कर राजस्व जुटाने के उपाय भी किए किये गये हैं।

उन्होंने कहा किबजट में राजकोषीय मजबूती के लक्ष्यों से समझौता किये बिना निवेश बढ़ाने की पूरी योजना के साथ विकास की बड़ी तस्वीर पेश की गयी है।

अर्थव्यवस्था का आकार मौजूदा 2,700 अरब डालर से बढ़ाकर 2024-25 तक 5,000 अरब डालर डालर के बारे में वित्त मंत्री ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा, ‘‘यह बिना योजना के नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि कृषि पर जोर के साथ याथ इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को और उदार बनाकर निवेश बढ़ाने, 400 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों के लिये कारपोरेट कर की दर में कमीं, इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर में कटौती, खुदरा व्यापरियों और दुकानदारों के लिये स्वैच्छिक पेंशन योजना का दायरा बढ़ाना और अगले पांच साल में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल हैं।

सीतारमण ने कहा कि आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये बजट में कई प्रकार के कच्चे माल पर आयात शुल्क में कटौती और ‘मेक इन इंडिया’ को गति, किसानों को नकद समर्थन तथा निवेश और वृद्धि के लिये व्यापक कदम उठाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में पांच सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति का गठन आदि जैसे तमाम उपाय किये गये हैं।

सीता रमन ने पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की इस आलोचना को आंकड़ों साथ खारिज किया कि बजट में आय/व्यय के अनुमान अव्यावहारिक है और इसके लक्ष्य प्राप्त होने वाले नहीं हैं। मत्री के इसजवाब के समय चिदंबरम सदनमें नहीं थे।

वित्त मंत्री कहा कि आयकर, उत्पाद शुल्क और जीएसटी संग्रह लक्ष्य प्राप्त करने योग्य हैं। उन्होंने इस संदर्भ में आंकड़े दिये।

वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर कर बढ़ाने तथा उत्पाद शुल्क/ सेवा कर के पुराने मामलों के समाधान की प्रस्तावित नयी योजना से उत्पाद शुल्क संग्रह बढ़ेगा। वहीं सरल रिटर्न फाइलिंग और कर चोरी पर लगाम लगाने के नये यत्नों से जीएसटी (माल एवं सेवा कर) संग्रह 14 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी।

चिदंबरम के यह कहने पर कि बजट में कोई साहसिक संरचनात्मक सुधारों की बात नहीं है जबकि चुनावों में मिली बहुमत को देखते हुए इसमें होना चाहिए था, सीतारमण ने कहा कि जुलाई 2017 में लागू जीएसटी और 2016 में ऋण शोधन अक्षमता तथा दिवाला संहिता उनकी सरकार के बड़े संरचनात्मक सुधार हैं।

सीतारमण ने बैंकों में पूंजी डाले जाने तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसे 16 सुधारों को रेखांकित किया।

अपने बजट भाषण में आबंटन के बारे में जिक्र नहीं होने की आलोचना के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि अनुसूची में आबंटन का जिक्र है। रोजगार गारंटी योजना, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, फसल बीमा और मध्याह्न भोजना योजना समेत आम लोगों से जुड़ी 99 योजनाओं के लिये कोष बढ़ाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति को नहीं बढ़ने दिया गया और इसे काबू में रखा गया है। यह सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है।

सीतारमण ने कहा कि बजट में एक दृष्टिकोण दिया गया है। इसमें अगले 10 साल के लिये व्यापक कदमों का उल्लेख किया गया है जबकि सरकार का मध्यम अवधि का लक्ष्य देश को 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाना है।

उन्होंने कहा, ‘‘बजट में कृषि और सामाजिक क्षेत्र खासकर स्वास्थ्य मद में निवेश बढ़ाने में इन क्षेत्रों के प्रति सरकारकी प्रतिबद्धता प्रतिबिंबित होती है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा तैयार आर्थिक समीक्षा और बजट में अलग-अलग आंकड़े दिये जाने के बारे में उन्होंने कहा कि दोनों दस्तावेज में आंकड़े सही हैं लेकिन उसमें अलग-अलग आधार का उपयोग किया गया है।

सीतारमण ने कहा, ‘‘बजट में जो भी अनुमान दिये गये हैं, वे व्यवहारिक हैं और उसके लिये पर्याप्त उपाय किये गये हैं।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले पांच साल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 3.19 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली गयी। ‘‘सरकार ने फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या का समाधान किया है।’’

किसानों से जुड़ी योजनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि प्रत्येक कृषकों को सालाना 6,000 रुपये देने, फसल लागत पर 50 प्रतिशत लाभ देने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की समय पर घोषणा से किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने में मदद मिलेगी।

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