24 Aug 2019, 22:21 HRS IST
  • मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि भागवत भवन में उमड़े श्रद्धालु
    मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि भागवत भवन में उमड़े श्रद्धालु
    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेते
    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेते
    कृष्ण जम्माष्टमी के मौके पर दही हांडी का एक नजारा
    कृष्ण जम्माष्टमी के मौके पर दही हांडी का एक नजारा
    मुंबई में दही हांडी उत्सव में शिरकत करते श्रद्धालु
    मुंबई में दही हांडी उत्सव में शिरकत करते श्रद्धालु
PTI
PTI
Select
खबर
Skip Navigation Linksहोम राष्ट्रीय
login
  • सबस्क्राइबर
  • यूज़र नाम
  • पासवर्ड   
  • याद रखें
ad
add
add
  • मानवाधिकार चर्चा दो अंतिम रास

  • विज्ञापन
  • [ - ] फ़ॉन्ट का आकार [ + ]
पीटीआई-भाषा संवाददाता 18:37 HRS IST

इस दौरान भाजपा के प्रभात झा और जदयू के आरसीपी सिंह ने कहा कि संशोधन प्रावधान मानवाधिकार आयोग की संस्था की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मददगार होंगे। झा ने कहा कि सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीशों और अन्य न्यायाधीशों की उपलब्धता नहीं होने के कारण राष्ट्रीय और राज्य आयोग के पद लंबे समय तक तक रिक्त रहते हैं। संशोधन प्रस्ताव से इस समस्या का समाधान होगा।

सिंह ने कहा कि विधेयक में छह प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें सदस्यों की पुनर्नियुक्ति और अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल कम करने और कम से कम एक महिला सदस्य की नियुक्ति को अनिवार्य करने का प्रावधान शामिल है। चर्चा में शामिल सदस्यों ने महिला सदस्य की नियुक्ति को अनिवार्य बनाने का स्वागत किया।

शिवसेना के संजय राउत ने कहा कि विधेयक में प्रस्तावित संशोधन के कारण मानवाधिकार आयोग की कार्यक्षमता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार हनन के सर्वाधिक शिकार कश्मीरी पंडित हुये है और इनकी घरवापसी तक आयोग में एक सदस्य कश्मीरी पंडित होने चाहिये।

द्रमुक के तिरुचि शिवा ने सरकार अपने चहेतों को आयोग में सदस्य बनाये रखने के लिये अगर पुनर्नियुक्ति करती है तो इससे कानून का मकसद पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी को शक्तिसंपन्न बनाने के उच्चतम न्यायालय के सुझावों का गंभीरता से पालन होना चाहिये।

भाजपा के राकेश सिन्हा ने कहा कि विदेशों में निर्वाचित संस्थाओं पर गैर निर्वाचित संस्थाओं के हावी होने के कारण मानवाधिकारों का हनन बढ़ा है। भारत में स्थिति इसके उलट है। उन्होंने सदस्यों का कार्यकाल कम किये जाने को उचित ठहराया। भारत मानवता को ध्यान में रखकर मानवाधिकार की बात करता है जबकि अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देश नस्लवाद और आर्थिक हितों को वरीयता देते हैं।

कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री ने आयोग के समक्ष जांच करने संबंधी संस्थागत जरूरी संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुये कहा कि संशोधनों के बावजूद कानून निष्प्रभावी ही रहेगा। उन्होंने कहा कि यह संशोधन सिर्फ संयुक्त राष्ट्र को खुश करने के लिये किया जा रहा है।

तेदेपा के के रविन्द्र कुमार ने कहा कि आयोग के पास अपनी स्वतंत्र जांच एजेंसी सहित अन्य संसाधन होने चाहिये। उन्होंने सदस्यों के कार्यकाल में कटौती और पुनर्नियुक्ति के प्रावधानों को विरोधाभाषी बताते हुये कहा कि इससे राजनीतिक नियुक्तियां बढ़ेंगी। उन्होंने आयोग को अर्धन्यायिक अधिकार संपन्न बनाने का सुझाव दिया।

कांग्रेस के रिपुन बोरा ने कहा कि सबसे ज्यादा मानवाधिकारों का हनन सैन्य क्षेत्रों में होता है। ऐसे में आयोग के पास सेना के खिलाफ शिकायतें स्वीकार करने का अधिकार और स्वायत्तता होनी चाहिये। उन्होंने महिलाओं के मानवाधिकारों का हनन सर्वाधिक होने की दलील देते हुये आयोगों में महिला सदस्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का सुझाव दिया।

आप के संजय सिंह ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह दिल्ली सरकार के प्रति दुर्भावना से काम कर रही है। उन्होंने इसे काना कानून बताया और इसके विरोध में सदन से वाकआउट किया।

चर्चा में भाजपा के चुन्नीभाई गोहेल, वाईएसआर के वी विजय साई रेड्डी, बसपा के राजाराम ने भी भाग लिया।

  • अपनी टिप्पणी पोस्ट करे ।