21 Nov 2019, 21:14 HRS IST
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  • अयोध्या फैसला : प्रधानमंत्री ने कहा- न कोई जीता, न कोई हारा, एआईएमपीएलबी चाहता है फैसले की समीक्षा

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 22:47 HRS IST

नयी दिल्ली, नौ नवंबर (भाषा) अयोध्या विवाद पर आए उच्चतम न्यायालय के फैसले को ‘नयी सुबह’ करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को फैसले पर कहा कि इसे किसी की हार-जीत के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए। वहीं इस फैसले पर मिली जुली प्रतिक्रिया आई है। भाजपा, उसके सहयोगी और कांग्रेस ने फैसले का स्वागत किया है जबकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के नेतृत्व में मुस्लिम पक्ष ने फैसले पर पुनर्विचार की मांग करने की इच्छा जताई है।

सर्वसम्मति से अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ करने और मुस्लिम पक्ष को शहर में ही महत्वपूर्ण स्थान पर मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर सभी पक्षों से प्रतिक्रिया आई है।

मुस्लिम पक्ष ने फैसले पर असंतुष्टि जाहिर करते हुए किया लेकिन साथ ही कहा कि वे फैसले को स्वीकार करेंगे और शांति और संयम की अपील की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसले के बाद ट्वीट किया, ‘‘राम भक्ति हो या रहीम भक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारत भक्ति की भावना को सशक्त करने का है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’’

प्रधानमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के अयोध्या मामले में फैसला सुनाये जाने के बाद राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा, ‘‘आज नौ नवंबर है। यह वही तारीख थी जब 1989 में बर्लिन की दीवार गिरी थी। दो विपरीत धाराओं ने एकजुट होकर नया संकल्प लिया था।



अयोध्या विवाद का संदर्भ देते हुए मोदी ने कहा कि फैसला नयी सुबह का संदेशवाहक है और लोगों से नये भारत के निर्माण में किसी भी भय, कटुता और नकारात्मकता को त्यागने की अपील की।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह आदेश मील का पत्थर साबित होगा और भारत की एकता और अखंडता को और मजबूत करेगा।

शाह ने कई ट्वीट करके सभी समुदायों और धर्मों से अपील की कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को सहजता से स्वीकार करें और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के लिये प्रतिबद्ध रहें।

अयोध्या मुद्दे पर न्यायालय के फैसले को “सच और न्याय” को रेखांकित करने वाला बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री के उसी नजरिये को दोहराया कि इसे किसी की हार या जीत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

फैसले का स्वागत करते हुए भागवत ने शनिवार को कहा कि दशकों तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह विधिसम्मत और ‘अंतिम निर्णय’ हुआ है और अब अतीत की बातों को भुलाकर सभी को मिलकर भव्य राममंदिर का निर्माण करना है

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से अयोध्या में राम मंदिर बनाने को प्रतिबद्ध थी और इस मुद्दे पर ‘गंभीर’ और ‘सकारात्मक’ भूमिका निभाई।

राजनाथ सिंह, प्रकाश जावड़ेकर और मुख्तार अब्बास नकवी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने इस फैसले की सराहना की।

राजनाथ ने ट्वीट किया,‘‘ माननीय उच्चतम न्यायालय का यह फैसला ऐतिहासिक है। इस फैसले से भारत का सामाजिक ताना - बाना और मजबूत होगा। मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि इस फैसले को समभाव और उदारता से लिया जाये। मैं लोगों से इस ऐतिहासिक फैसले के बाद शांति और सद्भाव बनाये रखने की अपील भी करता हूं ।’’

कांग्रेस ने कहा कि वह राम मंदिर निर्माण को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है।

सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस कार्य समिति द्वारा पारित प्रस्ताव में पार्टी ने कहा, “हम सभी संबंधित पक्षों और सभी समुदायों से निवेदन करते हैं कि वे भारत के संविधान में स्थापित ‘‘सर्वधर्म समभाव’’ तथा भाईचारे के उच्च मूल्यों को निभाते हुए अमन-चैन का वातावरण बनाए रखें। '

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एआईएमपीएलबी के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा, ‘‘हम उच्चतम न्यायालय के फैसले के कुछ बिंदुओं पर असंतुष्ट है... हम उच्चतम न्यायालय का सम्मान करते हैं और सम्मानजनक तरीके से कुछ पहुलओं से असहमत हैं।

उन्होंने कहा कि फैसले का अध्ययन कर समीक्षा की अपील करेंगे।

जिलानी ने कहा, ‘‘आतंरिक प्रांगण को भी दूसरे पक्ष को दे दिया गया है। बोर्ड जल्द ही बैठक कर इसपर चर्चा करेगा। सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

मामले में मुख्य प्रतिवादी उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इसे चुनौती देने की उसकी कोई योजना नहीं है।

बोर्ड के अध्यक्ष जफर अहमद फारूकी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं। बोर्ड का फैसले को चुनौती देने की कोई योजना नहीं है। अभी फैसले का अध्ययन किया जा रहा है जिसके बाद बोर्ड विस्तृत बयान जारी करेगा।’’

वहीं, वाम दलों ने कहा कि इस फैसले को किसी भी याचिकाकर्ता की जीत नहीं माना जाना चाहिए।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने एक बयान में कहा कि फैसले ने जहां इस विवादित मुद्दे का विधिक समाधान दिया है लेकिन इसमें कुछ हिस्से ऐसे हैं जो “सवालों के दायरे” में आते हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने एक बयान में कहा कि न्यायालय ने “संतोषजनक” फैसला दिया है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नेता असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में इसे ‘‘तथ्यों पर आस्था की जीत’’ करार दिया है ।

हैदराबाद के सांसद ने शीर्ष अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। एक पूर्व प्रधान न्यायाधीश के बयान का हवाला देते हुए ओवैसी ने संवाददाताओं से यहां बातचीत में कहा कि उच्चतम न्यायालय वस्तुत: सर्वोच्च है लेकिन उनसे भी गलती हो सकती है।

ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कुछ लोग तालिबानी मानसिकता के हैं और उनका देश की न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गयूरुल हसन रिजवी ने कहा कि मुसलमान इस फैसले से खुश हैं। उन्होंने जिलानी की टिप्पणी की निंदा की।

रिजवी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इससे बेहतर फैसला नहीं हो सकता था। हम सब इसका स्वागत करते हैं। इस फैसले से देश की एकता और भाईचारा मजबूत होगा।’’ राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई इकबाल अंसारी ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा शनिवार को दिए गए फैसले पर खुशी जाहिर की।

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान प्रमुख चेहरे रहे उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी और के एन गोविंदाचार्य ने भी फैसले पर प्रतिक्रिया दी।

उमा भारती ने यहां लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की और कहा कि मंदिर निर्माण के प्रति आडवाणी का समर्पण भाजपा की सफलता के मूल में है और इसने पार्टी की सत्ता में वापसी सुनश्चित की है।

गोविंदाचार्य ने इस आंदोलन की सफलता का श्रेय दिवंगत विहिप नेता अशोक सिंघल और वयोवृद्ध भाजपा नेता आडवाणी को दिया।

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने भी फैसले का स्वागत करते हुए इसे हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लिए खुशी और राहत देने वाला बताया है।

उल्लेखनीय है कि रविशंकर उच्चतम न्यायालय की ओर से अयोध्या विवाद को बातचीत जरिये सुलझाने के लिए बनाई गई मध्यस्थता समिति के सदस्य थे।

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