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  • ट्रंप के खिलाफ महाभियोग सुनवाई में आव्रजकों ने अपनी कहानियों से जताया देशभक्ति का जज्बा

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पीटीआई-भाषा संवाददाता 20:37 HRS IST

वाशिंगटन, 22 नवंबर (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा आव्रजन पर सख्त रुख अपनाया और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। हालांकि, उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारियों ने अपनी आव्रजक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए यह बताने की कोशिश की है कि आव्रजक भी अमेरिका की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की पूर्व सदस्य फियोना हिल मूल रूप से पूर्वोत्तर इंग्लैंड की हैं। उन्होंने गुरुवार को दी गई गवाही में कहा, ‘‘ मैं पूरे विश्वास से कह सकती हूं कि इस देश ने मुझे जो मौके दिए वे मुझे इंग्लैंड में कभी नहीं मिलते।

हिल ने कहा कि ब्रिटिश तरीके से बोलने की शैली से उनकी उन्नति में बाधा उत्पन्न हो सकती थी लेकिन अमेरिका में इसकी वजह से उन्होंने कभी भी पीछे नहीं रखा गया।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से काम करने वाले सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल एलेक्जेंडर विंडमैन ने मंगलवार को महाभियोग सुनवाई के दौरान दी गई गवाही में कहा कि उनका परिवार सोवियत संघ से अमेरिका तब आया जब वह मात्र तीन साल के थे।

विंडमैन ने अपने शुरुआती बयान में कहा कि वह और उनके भाई ने सोचा कि इस देश ने जिसने अधिनायकवादी उत्पीड़न से मुक्ति देते हुए शरण दी उसे लौटाने के लिए सेना में शामिल होना चाहिए।

उन्होंने समिति से कहा, ‘‘ रूस में कमान में अधिकारियों की श्रृंखला और निजी माध्यमों चैनलों के प्रति चिंता व्यक्त करना मेरे व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के लिए आत्मघाती होगा और सार्वजनिक रूप से मामले में गवाही देना जिसमें राष्ट्रपति भी शामिल हैं निश्चित तौर इसकी कीमत मेरी जान हो सकती है।’’

विंडमैन ने 40 साल पहले पिता द्वारा अमेरिकी नागरिक बनने और सार्वजनिक सेवा देने के लिए उठाए गए कदम के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह स्थान है जहां मैं आजादी से रह सकता हूं, मैं अपने और परिवार की सुरक्षा की चिंता से मुक्त हूं।

उन्होंने कहा, ‘‘पिताजी, मैं यहां अमेरिकी कांग्रेस की इमारत में बैठकर अपने निर्वाचित पेशेवरों से बात कर रहा हूं। अपने निर्वाचित सदस्यों से बात करना इस बात का सबूत है कि 40 साल पहले आपने सही फैसला किया था।’’ इसके साथ ही विंडमैन ने अपने पिता को आश्वस्त किया कि आप चिंता नहीं करें वह ठीक हैं।’’

इसी तरह की कहानी यूक्रेन में अमेरिका की पूर्व राजदूत मैरी योवानोविच ने भी बताई जो तीन साल की उम्र में कनाडा से अमेरिका आईं थी। उनके पिता सोवियत से भागकर कनाडा आए थे जबकि उनकी मां की परवरिश नाजी शासन वाले जर्मनी में हुई थी।

योवानोविच ने कहा, ‘‘ व्यक्तिगत इतिहास है, व्यक्तिगत इतिहास की वजह से मैं अमेरिका के प्रति आभार व्यक्त करती हूं और यूक्रेन के लोगों के प्रति सहानुभूति उत्पन्न होती है जो आजाद होना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा कि वह बिना किसी एजेंडे के अमेरिकी विदेश नीति को बढ़ाने के लिए विदेश सेवा से जुड़ी थी।

योवानोविच ने कहा, ‘‘ मेरी सेवा इस देश के प्रति आभार प्रकट करने का तरीका है जिसने मुझे और मेरे परिवार को सबकुछ दिया।’’

अन्य गवाह यूरोपीय संघ में राष्ट्रपति के राजदूत गेर्डन सोंडलैंड ने बताया कि यहूदी जनसंहार के दौरान कैसे उसके मातापिता यूरोप से भागकर पहले उरुग्वे आए और उसके बार अमेरिका के सिएटल में बस गए।

उन्होंने कहा, ‘‘अन्य प्रवासियों की तरह मेरे परिवार को भी आजादी की चाह थी और वे मौकों के भूखे थे।’’



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