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स्रोत: Alzheimer''s Association
श्रेणी: Medical and Health Care
लाइफस्टाइल में एक साथ कई बदलाव लाने से अधिकतम मेमोरी का लाभ मिलता है और इससे आनुवांशिक, प्रदूषण के कारण बढ़े अल्जाइमर के खतरे भी दूर हो सकते हैं
16/07/2019 12:58:14:647PM

लाइफस्टाइल में एक साथ कई बदलाव लाने से अधिकतम मेमोरी का लाभ मिलता है और इससे आनुवांशिक, प्रदूषण के कारण बढ़े अल्जाइमर के खतरे भी दूर हो सकते हैं 


लॉस एंजिलिस, 15 जुलाई, 2019, पीआरन्यूजवायर— एशियानेट। 

— अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस 2019 के निष्कर्ष 

लॉस एंजिलिस में आयोजित अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस



(एएआईसी) 2019 में पेश नया शोध स्वस्थ लाइफस्टाइल चुनने का सुझाव देता है— जिसमें स्वस्थ खानपान, व्यायाम और संज्ञानात्मक सक्रियता शामिल हो— इससे संज्ञानात्मक अवनति और डिमेंशिया का खतरा कम हो सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि लाइफस्टाइल में सुधार से आनुवांशिक और प्रदूषण समेत अन्य जोखिम कारकों से उभरने वाला खतरा भी कम हो सकता है और इन सबको एक साथ किया जाए तो अधिकतम मेमोरी का लाभ मिल सकता है। 


एएआईसी 2019 में पेश पांच शोध अध्ययनों का सुझाव है: 

— चार या पांच स्वस्थ लाइफस्टाइल उपाय अपनाने से अल्जाइमर्स डिमेंशिया का खतरा कोई उपाय नहीं आजमाने या एक ही उपाय अपनाने के मुकाबले 60 फीसदी तक कम हुआ। 

— स्वस्थ लाइफस्टाइल पर अमल करते रहने से अल्जाइमर्स के रोग का आनुवांशिक खतरा टल सकता है।

— उच्च संज्ञानात्मक सक्रियता रखने, औपचारिक शिक्षा से अर्जित संज्ञान और संज्ञानात्मक सक्रियता से बूढ़े मस्तिष्क को उच्च स्तरीय वायु प्रदूषण से लोगों को होने वाले डिमेंशिया का खतरा कम करने में लाभ मिल सकता है। 

— इस बात की पुष्टि होती है कि शुरुआती बालिग उम्र से लेकर अधेड़ उम्र के दौरान धूम्रपान का संबंध अधेड़ उम्र में या 40 साल की शुरुआत उम्र में संज्ञानात्मक गड़बड़ी से होता है। 

— अल्कोहल का इस्तेमाल बुजुर्ग महिलाओं में डिमेंशिया डिसआॅर्डर के बहुत ज्यादा बढ़ते खतरे से होता है। 

अल्जाइमर्स एसोसिएशन के मुख्य विज्ञान अधिकारी मारिया सी. कैरिलो, पीएचडी ने कहा, 'अल्जाइमर्स का जहां कोई सिद्ध इलाज या उपचार नहीं है, वहीं शोध का एक बड़ा हिस्सा अब दृढ़ता से सुझाव देता है कि स्वस्थ आदतों को एक साथ अपनाने से


मस्तिष्क की अच्छी सेहत बनती है और आपके संज्ञानात्मक हृास के खतरे को कम करता है। आज एएईसी में पेश शोध हमें प्राप्त करने योग्य, अमल में लाने योग्य सिफारिशें सुझाता है जो हमें पूरी तरह स्वस्थ जीवन अपनाने में मदद कर सकती हैं।'

डिमेंशिया के बढ़ते खतरे से पीड़ित लोगों में मल्टी—कंपोनेंट बदलाव से मेमोरी और सोचने की क्षमता सुरक्षित रह सकती है या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए अल्जाइमर्स एसोसिएशन जोखिम कम


+Reduce+Risk) (यू.एस. प्वाइंटर) करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार के जरिये मस्तिष्क के स्वास्थ्य की सुरक्षा पर अमेरिकी शोध का नेतृत्व कर रहा है। यू.एस. प्वाइंटर इन साझा सुधारों पर बड़े पैमाने पर, विविधतापूर्ण तरीके से और अमेरिकी आबादी के स्तर की जांच करने वाला पहला अध्ययन है। इन सुधारों में शारीरिक व्यायाम, पोषाहार काउंसिलिंग और सुधार, संज्ञानात्मक और सामाजिक प्रेरणा तथा स्वास्थ्य का उन्नत स्वप्रबंधन। यह अध्ययन अमेरिका के पांच राज्यों में कराया जा रहा है, जिसका शुरुआती परिणाम 2023 में आने की उम्मीद है। 

कई स्वस्थ लाइफस्टाइल उपाय अपनाने से डिमेंशिया का खतरा कम हो सकता है

उन्नत शोध बताता है कि कई स्वस्थ लाइफस्टाइल उपाय अपनाने से मस्तिष्क और शरीर की सेहत को अधिकतम लाभ मिलता है। शिकागो हेल्थ एंड एजिंग प्रोजेक्ट (सीएचएपी, एन=1,341) और रश मेमोरी एंड एजिंग प्रोजेक्ट (एमएपी, एन=920) के आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए शिकागो स्थित रश यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के असिस्टेंट प्रोफेसर क्लोदियन, धाना, एमडी, पीएचडी और उनके सहयोगियों ने जांच की कि अल्जाइमर्स रोग के खतरों को स्वस्थ लाइफस्टाइल से कैसे कम किया जाता है। शोधकर्ताओं ने पांच निम्न जोखिम लाइफस्टाइल उपायों पर फोकस किया: स्वस्थ खानपान, कम से कम सप्ताह में 150 मिनट का आंशिक से सश्रम शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान न करना, बहुत हल्के से आंशिक स्तर पर अल्कोहल का सेवन तथा संज्ञानात्मक संवर्धन गतिविधियों में सक्रिय रहना। 

सीएचएपी में नौ साल और एमएपी में छह साल का औसत समय खपाने के दौरान अल्जाइमर्स डिमेंशिया के क्रमश: 293 (21 फीसदी) और 229 (25 फीसदी) मामले देखे गए। चार या पांच निम्न जोखिम लाइफस्टाइल उपाय अपनाने वाले अध्ययन से जुड़े भागीदारों में शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर्स डिमेंशिया के 60 फीसदी से कम जोखिम पाए जब उनकी तुलना कोई भी नहीं या सिर्फ एक निम्न जोखिम उपाय का पालन करने से की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि एक या अधिक निम्न जोखिम लाइफस्टाइल उपाय अपनाने वाले भागीदारों, चाहे उनके उपायों की मौजूदा संख्या जितनी रही हो, उनके अल्जाइमर्स डिमेंशिया का खतरा अतिरिक्त 22 फीसदी तक कम हो गया। 

धाना ने कहा, 'इस अध्ययन में अल्जाइमर मनोभ्रंश के जोखिम को कम करने के लिए कई स्वस्थ जीवनशैली प्रथाओं का पालन करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। अमेरिका में

एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन कम है, और इसलिए इन जीवनशैली कारकों को बढ़ावा देना सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए प्राथमिक लक्ष्य बनना चाहिए।"

स्वस्थ जीवन शैली डिमेंशिया के आनुवांशिक जोखिम का सामना कर सकती है

आनुवंशिक कारकों को अल्जाइमर रोग के जोखिम को बढ़ाने के लिए जाना जाता है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली द्वारा इस जोखिम का मुकाबला किया जा सकता है या नहीं, यह अज्ञात है। यूरोपीय पूर्वजों के 196,383 वयस्कों के डाटा का उपयोग करते हुए, 60 वर्ष से अधिक आयु के और ब्रिटेन के बायोबैंक, एल्बोएटा कुआमा, पीएचडी, एक्सेटर मेडिकल स्कूल के एक शोध साथी और टीम से, ने 1,769 मामलों की पहचान की जो आठ वर्ष तक एक मध्ययुगीन अनुवर्ती अवधि में मनोभ्रंश के मामलों की पहचान करते हैं। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को मनोभ्रंश के लिए उच्च, मध्यवर्ती और कम आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों में बांटा और अनुकूल,

उनके आहार, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान और शराब की खपत के आधार पर मध्यवर्ती और प्रतिकूल जीवनशैली को वर्गीकृत किया।

आनुवांशिक खतरे का आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर्स रोग के जिनोम—स्तरीय सहयोगी अध्ययन के आंकड़ों के पूर्व प्रकाशन



पर आधारित पॉलिजेनिक रिस्क स्कोर (पीआरएस) का इस्तेमाल किया जिसमें अल्जाइमर्स के रोग से जुड़े सभी बदलाव शामिल हैं। प्रत्येक आनुवांशिक जोखिम कारक का आकलन अल्जाइमर्स से जुड़ी इसकी क्षमता के मुताबिक किया गया। लाइफस्टाइल अवस्था में शोधकर्ताओं ने मौजूदा धूम्रपान, नियमित शारीरिक व्यायाम, स्वस्थ खानपान और स्वस्थ बर्ताव के तौर पर अल्कोहल के मामूली सेवन पर विचार नहीं किया। 

शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि उच्च आनुवांशिक जोखिम और प्रतिकूल लाइफस्टाइल वाले भागीदारों में उन लोगों के मुकाबले तीन गुना अधिक डिमेंशिया विकसित होने का खतरा है जो निम्न आनुवांशिक जोखिम और अनुकूल लाइफस्टाइल (खतरे का अनुपात (एचआर)=2.83, 95 फीसदी, आश्वस्त अंतराल (सीआई)=2.09—3.83, पी<0.001) के साथ जीने वाले से तुलना की गई। सभी प्रकार के डिमेंशिया का खतरा प्रतिकूल लाइफस्टाइल (HR=0.68; 95% 

CI=0.51-0.90, p=0.008) की तुलना में अनुकूल लाइफस्टाइल अपनाने वाले उच्च आनुवांशिक जोखिम भागीदारों में 32 फीसदी निम्न पाया गया। आनुवांशिक कारक स्वस्थ लाइफस्टाइल और डिमेंशिया खतरे के बीच संबंधों को पर्याप्त रूप से संशोधित नहीं पाया गया। 

कुआमा ने कहा, 'यह शोध इस संदर्भ में उत्साहजनक है कि यह बताता है कि डिमेंशिया के आनुवांशिक जोखिम का मुकाबल करने की कोशिश में हम कार्य करने योग्य चीजें आजमा सकते हैं। हमारे अध्ययन में स्वस्थ जीवनशैली पर अमल करते रहने का ताल्लुक आनुवांशिक खतरे के बावजूद डिमेंशिया के कम होते खतरों से है।'

संज्ञानात्मक रिजर्व वायु प्रदूषण से होने वाले ब्रेन डैमेज से संभवतया बचा सकता है 

पूर्ववर्ती शोध बताता है कि उच्च स्तर के बाह्य वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वालों— खासकर जहां हवा में छोटे कण या फुहारें हों, उसे फाइन पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है— इसका ताल्लुक अल्जाइमर्स या अन्य डिमेंशिया जैसे उच्चतर स्तर से होता है और इस कारण ब्रेन डैमेज या ब्रेन श्रिंकेज की समस्या हो सकती है। शोधकर्ताओं ने यह भी दिखाया कि अल्जाइमर्स के कारण होने वाला ब्रेन डैमेज इस रोग से पीड़ित सभी व्यक्तियों में संज्ञानात्मक असंतुलन का समान स्तर नहीं होता है। इसे 'कॉग्निटिव रिजर्व' के रूप में वर्णित किया जा सकता है, जो संज्ञान पर ब्रेन डैमेज के नकारात्मक प्रभाव से निपटने की मस्तिष्क की क्षमता कहलाती है। 

एएआईसी 2019 में पेश इस नए शोध में यूनिवर्सिटी आॅफ सदर्न कैलिफोर्निया के सीनियर रिसर्च एसोसिएट डायना युनान, पीएचडी, एमपीएच और उनके सहयोगियों ने वीमेंस हेल्थ इनिशिएटिव मेमोरी स्टडी (एन=6,113) से 65 से 79 साल की महिलाओं की आबादी पर गौर किया जिन्हें यह परीक्षण किए जाने के लिए एनरॉलमेंट के दौरान डिमेंशिया नहीं था कि बाहरी वायु प्रदूषण और अल्जाइमर के खतरे के बीच संबंधों को संज्ञानात्मक सक्रियता प्रभावित करती है या नहीं। अध्ययन के भागीदारों— जो संज्ञानात्मक कार्यों के अंकों के आधार पर निम्न या उच्च संज्ञानात्मक सक्रियता, शिक्षा वर्ष, रोजगार स्थिति और शारीरिक गतिविधि के समूह में बांटे गए थे— को 14 साल निगरानी में रखा गया और हर साल उनके डिमेंशिया की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने प्रत्येक भागीदार के घर पर बाहरी वायु प्रदूषण स्तर आंकने के लिए गणितीय मॉडलिंग का इस्तेमाल किया। 

अध्ययन से पुष्टि हुई कि उच्च वायु प्रदूषण क्षेत्रों में रहने वालों को अल्जाइमर्स और अन्य डिमेंशिया का खतरा अधिक रहता है। महत्वपूर्ण बात यह कि उच्च संज्ञानात्मक सक्रियता वाली बुजुर्ग महिलाओं ने निम्न संज्ञानात्मक सक्रियता वाली महिलाओं के 113 फीसदी अधिक पर्यावरण खतरे के मुकाबले प्रदूषित स्थानों में रहने के कारण सिर्फ 21 फीसदी अधिक खतरा प्रदर्शित किया। 

युनान ने कहा, 'हमारा अध्ययन दर्शाता है कि शारीरिक और मानसिक उत्प्रेरक गतिविधियों में सक्रियता संज्ञानात्मक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण अवयव है और इसके परिणाम बाद की उम्र में बाहरी वायु प्रदूषण के कारण ब्रेन डैमेज से सुरक्षा दिला सकते हैं।' 

सिगरेट पीने से शुरुआती उम्र या अधेड़ उम्र तक संज्ञानात्मक क्रिया कम हो सकती है 

धूम्रपान संज्ञानात्मक उम्रवृद्धि के लिए एक रिस्क फैक्टर है लेकिन कुछ अध्ययनों में देखा गया है कि जीवनकाल पर धूम्रपान का प्रक्षेपणपथ कैसे संज्ञानात्मक कार्यों से जुड़े रहते हैं। यूनिवर्सिटी आॅफ कैलिफोर्निया, सान फ्रांसिस्को में पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता अंबर बहोरिक, पीएचडी, एमएसडब्ल्यू और उनकी टीम ने अध्ययन के मुख्य जांचकर्ता क्रिस्टीन याफ, एमडी के नेतृत्व में युवा बालिगों पर किए कोरोनरी आर्टरी रिस्क डेवलपमेंट अध्ययन (एन=3,364, औसत उम्र 50.1±3.6) किया और उनके संज्ञानात्मक कार्य का ताल्लुक निर्धारित करने के लिए 25 वर्षों तक उनके धूम्रपान प्रक्षेपपथ का अध्ययन किया। 

शोधकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान नहीं करने वालों की तुलना में 'स्थायी रूप से बहुत' धूम्रपान करने वालों में 1.5 गुना से 2.2 गुना तक संज्ञाानात्मक गड़बड़ी अधिक हो सकती है जबकि 'धूम्रपान छोड़ने वालों' और 'स्थायी रूप से बहुत कम धूम्रपान करने वालों' में बढ़ा हुआ खतरा नहीं रहता है। उन्होंने 10 साल से अधिक समय से दिनभर में एक पैकेट पीने वाले लोगों के सामूहिक धूम्रपान प्रभाव का ताल्लुक खराब संज्ञानात्मक कार्यों से भी जुड़ा पाया। संज्ञानात्मक असंतुलन 40 साल की उम्र में पहुंच चुके धूम्रपाने वालों में पाया गया। 

बहोरिक ने कहा, 'हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि आरंभिक वयस्क से अधेड़ उम्र में धूम्रपान का ताल्लुक हमारी उम्मीदों से कहीं ज्यादा आसानी से संज्ञानात्मक असंतुलन से होता है। यह लगातार धूम्रपान करने से कई स्वास्थ्य प्रक्रियाओं पर नकारात्मक असर और धूम्रपान त्यागने के लाभ के ठोस साक्ष्य भी देता है।'

वीरांगनाओं में अल्कोहल सेवन डिसआॅर्डर से डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है 

यूएस आर्म्ड फोर्स में प्रीवेंशन, डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट एंड मैनेजमेंट आॅफ सब्सटांस यूज डिसआॅर्डर पर बनी समिति के मुताबिक अल्कोहल सेवन डिसआॅर्डर (एयूडी) सैन्यकर्मियों में सबसे आम डिसआॅर्डर है और यह बीमारी महिलाओं में भी फैल रही है। अनिवार्य अल्कोहल सेवन के तौर पर नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ हेल्थ (एनआईएच) द्वारा एयूडी के बारे में आकलन है कि अल्कोहल सेवन से नियंत्रण खो देना और इस्तेमाल नहीं करने पर अलग—थलग रहना तकरीबन 16 मिलियन अमेरिकियों में देखा गया है। यूनिवर्सिटी आॅफ कैलिफोर्निया, सान फ्रांसिस्को के डॉ. बहोरिक और डॉ. याफ की टीम ने एक बार फिर अध्ययन कियाकि एयूडी से महिला सैनिकों में डिमेंशिया का खतरा कैसे बढ़ सकता है। 

शोधकर्ताओं ने अक्तूबर 2004 से सितंबर 2015 के दौरान वेटेरेंस हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन मेडिकल केंद्रों पर 55 साल से अधिक उम्र की एयूडी से पीड़ित 2,207 महिला सैनिकों और एयूडी से रहित 2,207 महिला सैनिकों पर अध्ययन किया, सभी महिलाएं बेसलाइन से डिमेंशिया मुक्त थीं। 3.6  साल के औसत फॉलोअप के दौरान एयूडी से पीड़ित 4 फीसदी महिला सैनिकों में एयूडी से मुक्त 1 फीसदी महिलाओं के मुकाबले डिमेंशिया पाया गया। जनसंख्या, मनोवैज्ञानिक स्थितियों और मेडिकल कमोर्बिडिटीज समायोजन के बाद एयूडी से पीड़ित महिलाओं में एयूडी से रहित महिलाओं के मुकाबले डिमेंशिया विकसित होने का खतरा तीन गुना अधिक पाया गया। 

बहोरिक ने कहा, 'यह अध्ययन अल्कोहल के सेवन, खासकर अल्कोहल यूज डिसआॅर्डर पर विचार करने की जरूरत को बताता है, जब डिमेंशिया के जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन किया जाता हो। यह बुजुर्ग महिलाओं में एयूडी तथा डिमेंशिया दोनों की बढ़ती समस्याओं से निपटने के लिए कार्यक्रमों और सेवाओं की जरूरत पर भी जोर देता है।'

बहोरिक ने कहा, 'हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि आरंभिक वयस्क से अधेड़ उम्र में धूम्रपान का ताल्लुक हमारी उम्मीदों से कहीं ज्यादा आसानी से संज्ञानात्मक असंतुलन से होता है। यह लगातार धूम्रपान करने से कई स्वास्थ्य प्रक्रियाओं पर नकारात्मक असर और धूम्रपान त्यागने के लाभ के ठोस साक्ष्य भी देता है।'

वीरांगनाओं में अल्कोहल सेवन डिसआॅर्डर से डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है 

यूएस आर्म्ड फोर्स में प्रीवेंशन, डायग्नोसिस, ट्रीटमेंट एंड मैनेजमेंट आॅफ सब्सटांस यूज डिसआॅर्डर पर बनी समिति के मुताबिक अल्कोहल सेवन डिसआॅर्डर (एयूडी) सैन्यकर्मियों में सबसे आम डिसआॅर्डर है और यह बीमारी महिलाओं में भी फैल रही है। अनिवार्य अल्कोहल सेवन के तौर पर नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ हेल्थ (एनआईएच) द्वारा एयूडी के बारे में आकलन है कि अल्कोहल सेवन से नियंत्रण खो देना और इस्तेमाल नहीं करने पर अलग—थलग रहना तकरीबन 16 मिलियन अमेरिकियों में देखा गया है। यूनिवर्सिटी आॅफ कैलिफोर्निया, सान फ्रांसिस्को के डॉ. बहोरिक और डॉ. याफ की टीम ने एक बार फिर अध्ययन कियाकि एयूडी से महिला सैनिकों में डिमेंशिया का खतरा कैसे बढ़ सकता है। 

शोधकर्ताओं ने अक्तूबर 2004 से सितंबर 2015 के दौरान वेटेरेंस हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन मेडिकल केंद्रों पर 55 साल से अधिक उम्र की एयूडी से पीड़ित 2,207 महिला सैनिकों और एयूडी से रहित 2,207 महिला सैनिकों पर अध्ययन किया, सभी महिलाएं बेसलाइन से डिमेंशिया मुक्त थीं। 3.6  साल के औसत फॉलोअप के दौरान एयूडी से पीड़ित 4 फीसदी महिला सैनिकों में एयूडी से मुक्त 1 फीसदी महिलाओं के मुकाबले डिमेंशिया पाया गया। जनसंख्या, मनोवैज्ञानिक स्थितियों और मेडिकल कमोर्बिडिटीज समायोजन के बाद एयूडी से पीड़ित महिलाओं में एयूडी से रहित महिलाओं के मुकाबले डिमेंशिया विकसित होने का खतरा तीन गुना अधिक पाया गया। 

बहोरिक ने कहा, 'यह अध्ययन अल्कोहल के सेवन, खासकर अल्कोहल यूज डिसआॅर्डर पर विचार करने की जरूरत को बताता है, जब डिमेंशिया के जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन किया जाता हो। यह बुजुर्ग महिलाओं में एयूडी तथा डिमेंशिया दोनों की बढ़ती समस्याओं से निपटने के लिए कार्यक्रमों और सेवाओं की जरूरत पर भी जोर देता है।'

एएआईसी के बारे में 

अल्जाइमर्स एसोसिएशन इंटरनेशनल कांफ्रेंस (एएआईसी) अल्जाइमर्स और डिमेंशिया पर केंद्रित विश्व के शोधकर्ताओं का सबसे बड़ा समूह है। अल्जाइमर्स एसोसिएशन के शोध कार्यक्रम के तहत एएआईसी डिमेंशिया के बारे में नई जानकारी प्रसारित करने के लिए उत्प्रेरक का काम करती है और एक अहम, कॉलेजियल शोध समाज को प्रोत्साहित करती है। 

एएआईसी 2019 होम पेज :www.alz.org/aaic/

एएआईसी 2019 न्यूजरूम:www.alz.org/aaic/pressroom.asp

अल्जाइमर्स एसोसिएशन (आर) के बारे में 

अल्जाइमर्स एसोसिएशन अल्जाइमर्स की देखभाल, सहयोग तथा शोध में एक अग्रणी स्वैच्छिक स्वास्थ्य संगठन है। हमारा उद्देश्य शोध के जरिये अल्जाइमर्स रोग को मिटाना है ताकि सभी प्रभाविं को देखभाल एवं सहयोग मिल सके और इसमें वृद्धि की जा सके और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के जरिये मनोरोग के खतरे को कम किया जा सके। हमारा मकसद विश्व को अल्जाइमर्स मुक्त बनाना है। देखें 



or call 800.272.3900.

 

    -- Klodian Dhana, MD, PhD, et al. Impact of Healthy Lifestyle Factors on 

       the Risk of Alzheimer's Dementia; Findings from Two Prospective Cohort 

       Studies. (Funded by the National Institute on Aging) 

    -- Elzbieta Kuzma, PhD, et al. Genetic Risk, Lifestyle and Dementia. 

       (Funder(s): James Tudor Foundation; Mary Kinross Charitable Trust; 

       Halpin Trust; National Institute for Health Research (NIHR) 

       Collaboration for Leadership in Applied Health Research and Care for 

       the South West Peninsula (PenCLAHRC); National Health and Medical 

       Research Council, Australia; National Institute on Aging/National 

       Institutes of Health (NIA/NIH); Alan Turing Institute under the 

       Engineering and Physical Sciences Research Council (EPSRC)) 

    -- Diana Younan, PhD, MPH, et al. Heterogeneity in the Increased Risk for 

       Alzheimer's Disease and Related Dementias Associated with Fine 

       Particle Exposure: Exploring the Role of Cognitive Reserve. (Funded by 

       the National Institute of Environmental Health Sciences with data 

       generated by a grant from the National Institute on Aging) 

    -- Amber Bahorik, PhD, et al. Early Adult to Mid-Life Cigarette Smoking 

       and Cognitive Function: Findings from the Cardia Study. (Funder: U.S. 

       National Institutes of Health) 

    -- Amber Bahorik, PhD, et al. Alcohol Use Disorders in Female Veterans 

       and the Impact on Dementia Risk. (Funder: U.S. Department of Defense)

स्रोत: अल्जाइमर्स एसोसिएशन 

संपादक : यह विज्ञप्ति आपको एशियानेट के साथ हुए समझौते के तहत प्रेषित की जा रही है। पीटीआई पर इसका कोई संपादकीय उत्तरदायित्व नहीं है।
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